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 *Kiran Shaheen*
*FIND WHAT YOU LOVE AND LET IT KILL YOU - Bukovski*




भय और नफरत की राजनीति के खिलाफ प्रतिरोध की आवाज

*कार्यक्रम स्थल - गांधी शांति प्रतिष्ठान*

*Day and Date - 29th October, Thursday*

*समय - **5** बजे सायं से*

*By आॅल इंडिया पीपुल्स फोरम **AIPF  दिल्ली*

साथियो,

देश में आज जो स्थिति दिखाई दे रही है, यह प्रतिक्रियावादी ताकतों द्वारा लंबे
समय से विभिन्न अप्रिय तरीकों से हमारे सामने आती रही है. लेकिन 2014 के
लोकसभा चुनाव के ठीक पहले मुजफ्फरनगर में अल्पसंख्यकों के जनसंहार के बाद से
इस सिलसिले ने एक संगठित और बर्बर रूप ले लिया है. स्थिति यह है कि न्यूनतम
असहमति और सोच को भी अब सहन नहीं किया जा रहा है. गोविंद पानसारे से लेकर
कलबुर्गी की हत्या इस ओर साफ-साफ संकेत कर रही हैं तो दूसरी ओर
अल्पसंख्यकों-दलितों पर एक के बाद एक हमले बढ़ रहे हैं, हाल में दादरी में
अखलाक की जिस नृशंस तरीके से हत्या की गई वह अल्पसंख्यकों में बनाए जा रहे खौफ
का संकेत देता है. याद कीजिए इससे पहले मुजफ्फरनगर दंगों पर भी उत्तर प्रदेश
में भाजपा ने वोटों की फसल उगाई थी. आज जब हमले लगातार बढ़ रहे हैं इसकी जद
में पुणे-धारवाड़-मुंबई-बंगलुरु-रांची-कानपुर-जम्मू-सिरमौर जैसे
महानगरों, छोटे-बड़े
कस्बों तक अल्पसंख्यकों, दलितों,  लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं यानि कि
समाज का हर वो हिस्सा जो उसकी हिंन्दुत्ववादी राजनीति और नीतियों के खिलाफ
जाता है, वह इनके निशाने पर है.

मौत-भय-घृणा का यह सारा माहौल पूरे देश में मोदी सरकार द्वारा जनता को दिए गए
एजेण्डे के बुरी तरह असफल साबित होने के कारण भी कायम किया जा रहा है.
किसानों-मजदूरों-छात्र-नौजवानों के सवाल एक बार फिर सामने आने लगे हैं. वास्तव
में भाजपा के कॉरपोरेट एजेण्डे और संघ की इस देश को हिंन्दू राष्ट्र के रूप
में देखने की उद्दाम इच्छा से मौत-खौफ और असुरक्षा एक ऐसा वातावरण बना देना
चाहते हैं जिसमें कॉरपोरेट को शोषण और लूट की पूरी छूट मिले और संघियों को
राष्ट्र की गंगा-जमुनी तहजीब को बदल एक हिंदू राष्ट्र बनाने की.

साथियो, इस सब के बावजूद जगह-जगह जनता प्रतिवाद में उतरी है. आजाद भारत में
पहली बार एक साथ इतनी तादाद में लेखकों-लेखिकाओं और कलाकारों ने सम्मान, पुरस्कार
लौटा कर और पदों से इस्तीफा देकर ‘सत्य से सत्ता के युद्ध’ में अपना पक्ष
घोषित किया है. संघ और भाजपा के इस बर्बर अभियान के खिलाफ उठ रही विरोध और
प्रतिरोध की आवाजों का हम भी हिस्सा बनें.

एआईपीएफ 29 अक्टूबर को देश में स्थापित की जा रही भय की सत्ता के विरूद्ध जनता
का प्रतिवाद कार्यक्रम आयोजित कर रहा है. आप इस कार्यक्रम का हिस्सा अवश्य बने
और संकट के इस मौके पर अपनी भूमिका तय करें.

*- **स्वपन मुखर्जी**, **एन.डी. पंचोली**, **जाॅन दयाल**,**गौतम मोदी**, रोमा
मलिक,* *विजय प्रताप**, **प्रेम सिंह गहलावत*
* किरन शाहीन**, **अविजित**, **कुमार सुन्दरम**, **अमर सिंह अमर**, अंबरीश राय**,
**रफीक मुल्ला**, **अखिल**, **गिरिजा पाठक*
(9968085975, 9897064627, 9818065092, 9013596196)

*आॅल इंडिया पीपुल्स फोरम **AIPF**  दिल्ली ki taraf se *


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All India People's Forum (AIPF)

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